सक्ती : ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन एवं चक्काजाम…
सक्ती : आज सर्व ओबीसी समाज द्वारा छत्तीसगढ़ की सक्ति जिले में सर्व ओबीसी समाज के आरक्षण को काटे जाने के विरोध में सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला अध्यक्ष प्रदीप यादव, यादराम यादव युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष शामिल हुए। साथ ही सर्व ओबीसी समाज में अपना संदेश दिया कि आरक्षण हमारा संवैधानिक अधिकार है जो कि अनुच्छेद 16 (4) के अंतर्गत 7 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री बीपी सिंह द्वारा लागू किया गया था। इसके हिसाब से पूरे छत्तीसगढ़ में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिया जा रहा था, जिसको त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नगरी निकाय चुनाव जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में शून्य कर दिया गया है एवं सभी ग्राम पंचायत में जहां 5 से 7 पंच ओबीसी वर्ग के लिया आरक्षित होता था वहां पर एक या शून्य कर दिया गया। जिससे ओबीसी वर्ग में असंतोष व्याप्त है उसी को लेकर की जा रही चक्का जाम एवं धरना प्रदर्शन में सारंगढ़ जिला भी शामिल रहा। आने वाले समय में सारंगढ़ जिला में भी ओबीसी सीटों और हितों की रक्षा हेतु राज्यपाल के नाम आरक्षण को पूर्व अनुसार करने हेतु ज्ञापन सौंपने हेतु सामाजिक प्रमुखों के सामने निर्णय लिया गया साथ ही सारंगढ़ जिले से अपने संवैधानिक अधिकार हेतु हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का भी निर्णय लिया गया है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष रमेश यादव जी सर्व ओबीसी समाज एवं दिवाकर यादव जी जिलाध्यक्ष शक्ति के अध्यक्षता में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन और चक्का जाम का कार्यक्रम रखा गया।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग को 50% आरक्षण देने का वादा कर त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव एवं नगरी निकाय चुनाव में ओबीसी वर्ग को मिलने वाले आरक्षण में कटौती कर दिया गया है, जिससे आक्रोशित होकर सर्वओबीसी समाज ने मिलकर विशाल धरना प्रदर्शन सहित शक्ति के कचहरी चौक में चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। सर्व ओबीसी समाज से समस्त वर्ग के जिला अध्यक्ष मौजूद रहे जिन्होंने ओबीसी वर्ग के आरक्षण में हुई छेड़छाड़ पर गहरा चिंतन कर आने वाले समय में एक जुट होकर राजधानी में जंगी प्रदर्शन करने हेतु सहमति बनी।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु ओबीसी के लिए एक भी सीट आरक्षित न कर सरकार ने पिछड़ा वर्गों के संवैधानिक हितों पर कुठाराघात कर असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा पार कर दी है।
राज्य में लगभग आधी आबादी पिछड़ा समुदाय की है। तों सवाल उठाना जायज है।सरकार पिछड़ा समुदाय के तेली , कुर्मी, राऊत, मरार, अघरिया ,कलार , पनिका, कोस्टा, केवट,धोबी, नाऊ, सोनार, लोहार, कुम्हार चन्नाहु को उनका हक देने में विलंब करती है तो समाज आगे उग्र आंदोलन करने हेतु रणनीति बनाई गई। जिसमें सर्व ओबीसी समाज समस्त गांव-गांव जाकर लोगों को जागरुक कर लोगों को समझाने हेतु निर्णय लिया गया कि अगर यह आरक्षण नौकरी में भी लागू किया जाएगा तो ओबीसी वर्ग से कोई भी भविष्य में कर्मचारी नहीं बन पाएंगे एवं आरक्षण के आधार पर मिलने वाली समस्त सेवाओं से ओबीसी वर्ग को वंचित होना पड़ेगा इसलिए उग्र आंदोलन करने हेतु निर्णय लिया गया।








