क्लीनिक सील : अस्पताल संचालक को नोटिस…लेकिन गांवो में बेख़ौफ झोला छाप सक्रिय…
गिरीश सोनवानी
देवभोग : झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मुख्यालय से लेकर गांव गांव में ईलाज करने की शिकवा शिकायत के बाद आखिरकार स्थानीय स्वास्थ विभाग द्वारा छापेमार कार्यवाही करते आर एल पंडा के निजी क्लिनिक को सील करने के अलावा देवमाता अस्पताल के संचालक को नोटिस देने की कार्यवाही को अंजाम दिया जिसके बाद से यह कार्यवाही को लेकर जगह जगह खिल्ली उड़ाया जा रहा है क्योंकि शासकीय अस्पताल से निकलते ही निजी क्लीनिकों का दुकान शुरू हो जाता हैं इसके मुख्यालय को छोड़ने के बाद अक्सर गांव में 8वी 10 वी पास व्यक्ति भी ईलाज करता नजर आता है फिर भी एक क्लिनिक को सील और देवमाता अस्पताल के संचालक को नोटिस की कार्यवाही समझ से परे है। जिसके बाद जिला अधिकारियों के निर्देश पर बीएमओ प्रकाश साहू अपने दल बल के साथ सबसे झाखरपारा मार्ग पर स्थित पंडा डॉक्टर के क्लीनिक पर दबिश देते दस्तावेज की दिखाने कहा लेकिन मौके पर किसी प्रकार की कोई दस्तावेज नहीं रखकर इलाज वाले क्लीनिक को सील कर दिया इसके बाद जांच टीम देवमाता अस्पताल पहुंची जहां कौने कौने की अव्यवस्था को देख नोटिस जारी करते दस्तावेज मंगाया गया है तत्पश्चात टीम ने गिरसूल सीनापाली इलाके का मुआयना किया मगर झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी अपनी दुकान बंद कर अंडरग्राउंड रहे हालांकि गांव गांव घातक झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही करना अतिआवश्यक बताया जाता क्योंकि ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के चलते अधिकांश मरीजों को शारीरिक नुकसान उठाना पड़ रहा है जिसके मद्देनजर बीएमओ प्रकाश साहू ने यह कार्यवाही नितरण जारी रखने का संकेत दे दिया है।

यह तीन जगह दवाइयों का जखीरा लेकर करते हैं ईलाज
पहला : सीतलीजोर पर बंगाली डॉक्टर दवाईयों का ज़खीरा लेकर भतराबहेली फ़लसापारा माहुलकोट ,गाड़ाघाट के भोले भाले आम मरीजों के बीच पहुंचकर हाई डोज के साथ ईलाज करते लोगो को लूटने के साथ उनकी शरीर को भी नुकसान पहुंचाने का काम कर रहा है जबकि इस तथाकथित डॉक्टर के खिलाफ कुछ माह पहले कार्यवाही भी किया गया रहा लेकिन अधिकारियों से सांठ गांठ कर पुनः झोलाछाप डॉक्टर बनकर मरीजों की जिंदगी से खेल रहा है।
दूसरा : दरलीपारा इलाके में तथाकथित पात्र डाक्टर द्वारा बैग में दवाई का ज़किरा लेकर धूपकोट नागलदेही तुवासमाल सहित आजू बाजू के गांव में हर शाम ईलाज करते देखे जा सकते है बताया तो यह भी जाता हैं कि जितना अस्पताल की दवाई उपयोग उससे कई गुना हाई डोज दवाई मेडिकल से लेकर आम मरीजों के ईलाज में लगा देते हैं जिससे स्थानीय स्वास्थ अमला भी अवगत है मगर अफसोस की बात है कि अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाया।
तीसरा : मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर डोंगरीगुड़ा के अलावा माहुलकोट पर बंगाली डॉक्टर द्वारा मूचबहाल कदलीमुड़ा के साथ आजू बाजू के कई गांव में घूम घूम कर ईलाज करते हैं इनके पास तो ऐसे ऐसे दवाई उपलब्ध होने की बात कही जाती जो मुख्यालय के डॉक्टर भी इस्तेमाल नहीं करते और ऐसे दवाई से ही मरीजों की तबियत और अधिक खराब होने की अंतिम स्थिति में शासकीय अस्पताल लेने का सलाह देते हैं।








