Exclusive : तीन साल से अटकी पदोन्नति पर बढ़ा दबाव…अब शिक्षकों ने उठाई सर्वोच्च न्यायालय और NCTE नियमों की आवाज…
बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में पिछले लगभग तीन वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव तथा लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों तथा छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 के अनुरूप शीघ्र पूर्ण कराई जाए।
साझा मंच का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया के लंबे समय तक लंबित रहने से हजारों शिक्षक एवं विभागीय कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही विद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मंच ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 15 मई 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार सभी संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को 30 जून 2026 तक पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है शिक्षकों की मुख्य आपत्ति?
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश के कई जिलों से ऐसी जानकारियां सामने आ रही हैं जहां नवीन नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करते हुए पुरानी व्यवस्था के आधार पर वरिष्ठता सूची एवं पदक्रम तैयार किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। मंच का आरोप है कि कुछ संगठनों द्वारा विभिन्न ज्ञापनों और समाचार माध्यमों के जरिए अधिकारियों पर दबाव बनाकर पदोन्नति प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी मामले में दिए गए निर्णय तथा 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिका पर पारित आदेश में NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अर्हताओं के पालन को अनिवार्य माना गया है। मंच के अनुसार लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए उत्तर में भी उच्च प्राथमिक स्तर पर पदोन्नति के लिए NCTE मानकों का पालन आवश्यक बताया गया है।
विभागीय परीक्षा को लेकर भी उठाए सवाल : टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक साझा मंच ने स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में सेवा में कार्यरत शिक्षकों के संदर्भ में जिस परीक्षा का उल्लेख किया गया है, उसका संबंध सेवा में बने रहने की व्यवस्था से है, न कि पदोन्नति के लिए किसी नई विभागीय परीक्षा आयोजित करने से। मंच का दावा है कि राज्य शासन ने पूर्व में कभी पदोन्नति के लिए पृथक विभागीय परीक्षा आयोजित नहीं की है और वर्तमान में पर्याप्त संख्या में टीईटी उत्तीर्ण एवं निर्धारित योग्यता रखने वाले शिक्षक उपलब्ध हैं।
साझा मंच ने शासन से चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश, NCTE विनियमों एवं भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2026 के अनुरूप पदोन्नति प्रक्रिया के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय संयुक्त संचालकों को स्पष्ट एवं बाध्यकारी निर्देश जारी किए जाएं।
1 अप्रैल 2026 की स्थिति में निर्धारित वैधानिक अर्हताएं पूर्ण करने वाले शिक्षकों को शामिल करते हुए वरिष्ठता सूची और पदक्रम तैयार किया जाए।
प्रदेश के सभी जिलों में समान मापदंड और एकरूप नियमों के आधार पर निर्धारित समय सीमा के भीतर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए।
छात्रहित, शिक्षकहित तथा शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए लंबित पदोन्नतियों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
शिक्षकों में बढ़ रही उम्मीदें : ज्ञापन में कहा गया है कि यदि शासन स्तर पर समयबद्ध और स्पष्ट निर्णय लिया जाता है तो वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को गति मिलेगी, शिक्षकों में व्याप्त असंतोष कम होगा और प्रदेश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ज्ञापन से जुड़े प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता :
ज्ञापन में सूर्यप्रकाश साहू सहित सुरेखा साहू, हेमन रात्रे, उदे लाल साहू, गंगाधर पैकरा, तुलसी साहू, गणेश्वर अज़ाद, लोमश पटेल, संदीप कुमार, मुंडेश कुमार सोनी तथा घनश्याम वैष्णव सहित अन्य शिक्षकों के नाम दर्ज हैं। सभी ने नियमसम्मत एवं पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया की मांग की है।












